थानों में CCTV को लेकर हाईकोर्ट सख्त, डीजीपी से मांगी रिपोर्ट; लापरवाही पर अवमानना की चेतावनी
रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के सभी पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगाने में हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पुलिस प्रशासन से पूछा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अब तक सभी थानों में CCTV क्यों नहीं लगाए गए हैं।
चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने डीजीपी को निर्देश दिया है कि 27 जून 2026 तक राज्यभर के थानों में CCTV कैमरों की स्थापना की अद्यतन स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई 2026 को होगी।
सुनवाई के दौरान सरायकेला-खरसावां एसपी के जवाब पर भी कोर्ट ने असंतोष जताया। एसपी ने बताया था कि CCTV लगाने के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है। इस पर कोर्ट ने कहा कि केवल टेंडर प्रक्रिया का हवाला देना पर्याप्त नहीं है और यह नहीं बताता कि आदेश का पालन कब तक होगा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JHALSA) और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के माध्यम से थानों में CCTV की वास्तविक स्थिति की जांच कराई जाएगी।
इसी मामले में कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को भी 29 जून तक शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने पूछा है कि उस मेडिकल अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, जिसने चोट के निशान होने के बावजूद तरुण महतो को ‘फिट फॉर कस्टडी’ का प्रमाण पत्र दिया था।
यह मामला इचागढ़ निवासी तरुण महतो से जुड़ा है। आरोप है कि नवंबर 2025 में पुलिस हिरासत के दौरान उनके साथ मारपीट और थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया गया था। उनकी पत्नी द्वारा मुख्य न्यायाधीश को भेजे गए पत्र पर स्वतः संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने इस मामले को जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया था।


