चाईबासा ट्रेजरी फर्जी वेतन निकासी मामला: तीन आरोपियों की जमानत याचिका खारिज

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चाईबासा ट्रेजरी फर्जी वेतन निकासी मामला: तीन आरोपियों की जमानत याचिका खारिज


रांची/चाईबासा: चाईबासा जिला कोषागार (ट्रेजरी) से फर्जी तरीके से अवैध वेतन निकासी के चर्चित मामले में जेल में बंद आरोपियों को अदालत से बड़ा झटका लगा है। सीआईडी के विशेष न्यायाधीश कुलदीप की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन प्रमुख आरोपियों सरकार हेम्ब्रम, अरुण कुमार मार्डी और देवनारायण मुर्मू की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं।


अदालत ने मामले से संबंधित केस डायरी का अवलोकन करने, सीआईडी एवं बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद पाया कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। इसके आधार पर तीनों आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया गया।


पहले सुरक्षित रखा गया था फैसला

जानकारी के अनुसार, पिछली सुनवाई में सरकार हेम्ब्रम और अरुण कुमार मार्डी की जमानत याचिकाओं पर बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। वहीं देवनारायण मुर्मू की याचिका पर भी सुनवाई पूरी कर आदेश सुरक्षित रखा गया था। गुरुवार को अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए तीनों याचिकाओं को खारिज कर दिया।


क्या है मामला?

मामला चाईबासा जिला कोषागार से कथित मिलीभगत कर फर्जी तरीके से सरकारी धन एवं वेतन की अवैध निकासी से जुड़ा है। वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा होने के बाद सीआईडी ने मामले की जांच शुरू करते हुए कांड दर्ज किया था।


चार आरोपी जेल में

सीआईडी ने इस मामले में अब तक कुल चार लोगों को मुख्य आरोपी बनाया है। इनमें से एक अन्य आरोपी गोराचंद मार्डी पहले से ही न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है। अदालत के ताजा फैसले के बाद सभी चारों आरोपी फिलहाल जेल में ही रहेंगे।


जांच जारी

सीआईडी की ओर से मामले की विस्तृत जांच अभी भी जारी है। जांच एजेंसी घोटाले से जुड़े अन्य पहलुओं और संभावित संलिप्त व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।



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