पंचशील नगर के 62 फीट चौड़े नाले की तलाश में एम भारत 24 न्यूज़ लाइव की पड़ताल

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पंचशील नगर का सच – भाग 7


पंचशील नगर के 62 फीट चौड़े नाले की तलाश में एम भारत 24 न्यूज़ लाइव की पड़ताल


रांची: पंचशील नगर चौक में हर वर्ष होने वाले जलजमाव और घंटों तक लगने वाले जाम के पीछे आखिर असली कारण क्या है? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए एम भारत 24 न्यूज़ लाइव ने राजस्व अभिलेखों, झारभूमि रिकॉर्ड और पुराने नक्शों का अध्ययन किया। जांच में ऐसे दस्तावेज सामने आए हैं जो कथित 62 फीट चौड़े नाले के अस्तित्व की ओर संकेत करते हैं।



Map- 001

ऊपर दिए गए नक्शा 001 को देखें। यही वह कथित 62 फीट चौड़ा नाला है, जिसकी नापी जिला प्रशासन वर्षों से करवा रहा है, लेकिन अब तक किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सका है। नक्शे के अनुसार खाता संख्या 210 का प्लॉट संख्या 1075 राजस्व अभिलेखों में "परती नाला" के रूप में दर्ज है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसी प्लॉट संख्या 1075 की नाला भूमि पर लगभग 6 मकान और दुकानें बनाकर अतिक्रमण किया गया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार यह नाला आगे बढ़कर राष्ट्रीय राजमार्ग-75 (एनएच-75) को पार करता है और सड़क के दूसरी ओर स्थित प्लॉट संख्या 1081 से जुड़ जाता है जहां 1081 प्लॉट भी नाला का ही जमीन है। उनका दावा है कि यह एक सतत जल निकासी मार्ग था, जो समय के साथ सिकुड़ता चला गया।


अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कैसे प्रमाणित किया जाए कि प्लॉट संख्या 1075 वास्तव में नाले की भूमि है और उस पर अतिक्रमण हुआ है?

इस सवाल का जवाब समझने के लिए नीचे दिए गए नक्शा और राजस्व अभिलेखों को देखना आवश्यक है। यदि प्लॉट संख्या 1075 वास्तव में नाला है, तो उसके आगे और पीछे भी नाले की जमीन दर्ज होनी चाहिए। किसी भी प्राकृतिक या राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नाले का अस्तित्व अचानक किसी एक भूखंड से शुरू या समाप्त नहीं हो सकता। इसलिए एम भारत 24 न्यूज़ लाइव ने 1075 नंबर प्लॉट के आसपास के भूखंडों और पुराने अभिलेखों की भी पड़ताल की।


जांच में मिले दस्तावेज और नक्शे यह समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं कि कथित 62 फीट चौड़ा नाला कहां से आता था, कहां तक जाता था और क्या वास्तव में उसके किसी हिस्से पर अतिक्रमण हुआ है।


नीचे दिए गए नक्शे से यह पूरी तस्वीर और स्पष्ट होती है।



नक्शे के अनुसार ऊपर की ओर नीले रंग से राष्ट्रीय राजमार्ग-75 (एनएच-75) दर्शाया गया है। सड़क का बायां हिस्सा पंडरा की ओर तथा दाहिना हिस्सा पिस्का मोड़ की ओर जाता है। इसी मार्ग के बीच स्थित क्षेत्र, जिसे नक्शे में तीर संख्या-3 से दर्शाया गया है, हर वर्ष जलजमाव की गंभीर समस्या का सामना करता है।

नक्शे में तीर संख्या-1 जिस भूखंड की ओर संकेत कर रहा है, वह प्लॉट संख्या 1075 है। राजस्व अभिलेखों के अनुसार यह खाता संख्या 210 का भूखंड है, जिसका रकबा लगभग 39 डिसमिल है और इसकी प्रकृति "परती नाला" दर्ज है।

वहीं तीर संख्या-2 द्वारा काले रंग से चिह्नित क्षेत्र को स्थानीय लोग नाले का कथित अतिक्रमित हिस्सा बताते हैं। उनका आरोप है कि प्लॉट संख्या 1075 के एक भाग पर अतिक्रमण कर मकान और दुकानें बना दी गई हैं, जिससे नाले की मूल चौड़ाई कम हो गई है।

स्थानीय लोगों के अनुसार यह नाला आगे बढ़कर राष्ट्रीय राजमार्ग-75 को पार करता है और सड़क के दूसरी ओर स्थित प्लॉट संख्या 1081  (तीर संख्या- 4 से दिखाया गया है) में दर्ज नाले से जाकर मिलता है। उनका कहना है कि कभी लगभग 62 फीट चौड़ा यह नाला वर्षा जल निकासी का प्रमुख मार्ग था, लेकिन समय के साथ इसके एक हिस्से पर कथित अतिक्रमण होने से इसकी चौड़ाई लगातार घटती गई।


ऊपर दिए झारभूमि के राजस्व अभिलेख इस बात की पुष्टि करते हैं कि खाता संख्या 210 का प्लॉट संख्या 1075 "परती नाला" के रूप में दर्ज है। राजस्व रिकॉर्ड में इसकी प्रकृति स्पष्ट रूप से नाला भूमि बताई गई है, जिससे यह साबित होता है कि संबंधित भूखंड मूल रूप से जल निकासी मार्ग का हिस्सा रहा है।

1932 के खतियान में भी प्लॉट संख्या 1075 को "परती नाला" के रूप में दर्ज किया गया है। इससे यह पुष्टि होती है कि उक्त भूखंड राजस्व अभिलेखों में नाला भूमि की श्रेणी में दर्ज रहा है और इसका स्वरूप परती नाला के रूप में मान्य था।

अब नाले के भूगोल को समझिए

एम भारत 24 न्यूज़ लाइव ने कथित 62 फीट चौड़े नाले की जमीन की पड़ताल प्लॉट संख्या 1075 के पीछे वाले हिस्से से शुरू की। इसके पीछे तर्क यह था कि यदि प्लॉट संख्या 1075 वास्तव में नाला भूमि है, तो नाला कहीं न कहीं से आकर इस भूखंड में प्रवेश करता होगा। ऐसे में इसके पीछे भी नाले से संबंधित भूमि का रिकॉर्ड होना चाहिए।

नीचे दिया गया नक्शा इसी तथ्य की ओर संकेत करता है। नक्शे के अनुसार प्लॉट संख्या 1075 के पीछे भी नाले की जमीन दर्ज है। यदि पीछे की ओर नाले का कोई अस्तित्व नहीं होता, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि नाला अचानक प्लॉट संख्या 1075 में कहां से आ गया? इसी प्रश्न का उत्तर तलाशने के लिए एम भारत 24 न्यूज़ लाइव ने 1075 नंबर प्लॉट से जुड़े आसपास के भूखंडों और राजस्व अभिलेखों की जांच की, जिससे नाले के वास्तविक भूगोल और उसके प्रवाह मार्ग को समझा जा सके।


यह नक्शा इस बात की पुष्टि करता है कि प्लॉट संख्या 1075 के आगे और पीछे दोनों ओर नाले का अस्तित्व दर्ज है। अर्थात यह भूखंड किसी अलग-थलग नाले का हिस्सा नहीं, बल्कि एक सतत जल निकासी मार्ग का भाग प्रतीत होता है। 


उपरोक्त झारभूमि के अभिलेख इस बात की पुष्टि करता है कि खाता संख्या 210 के प्लॉट संख्या 1075 के आगे और पीछे दोनों ओर नाले का अस्तित्व दर्ज है।

पंडरा मौजा के खाता संख्या 210 में स्थित प्लॉट संख्या 1075 स्वयं नाले की भूमि के रूप में दर्ज है। इसके अतिरिक्त, प्लॉट संख्या 1075 के पीछे स्थित प्लॉट संख्या 1072 में भी 11 डिसमिल भूमि नाला के रूप में दर्ज है। अर्थात खाता संख्या 210 के प्लॉट संख्या 1072 और 1075, दोनों नाले की भूमि हैं।

इस प्रकार अभिलेखों और नक्शे से यह स्पष्ट होता है कि प्लॉट संख्या 1075 के पीछे भी नाले की भूमि (प्लॉट संख्या 1072) मौजूद है, जिससे यह संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र में नाले का अस्तित्व दोनों ओर दर्ज रहा है।


प्लॉट संख्या 1072 के पीछे स्थित हेहल मौजा के खाता संख्या 169 में भी नाले की जमीन दर्ज है। राजस्व अभिलेखों के अनुसार, प्लॉट संख्या 105 में लगभग 5 डिसमिल तथा प्लॉट संख्या 108 में लगभग 7 डिसमिल भूमि नाला के रूप में दर्ज पाई गई है।

इस प्रकार पंडरा मौजा के खाता संख्या 210 के प्लॉट संख्या 1075 और 1072 के बाद भी हेहल मौजा में नाले की भूमि दर्ज मिलती है। नक्शे और राजस्व अभिलेखों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि इस क्षेत्र में नाले का अस्तित्व विभिन्न प्लॉटों में दर्ज रहा है।

इस प्रकार M भारत 24 न्यूज़ लाइव ने नाला के इतिहास और भूगोल दोनों का उल्लेख किया है और अतिक्रमण स्थल का भी नक्शा बनाकर 62 फीट नाला की खोज की है। 

अगले भाग में...

नाला का अतिक्रमण कभी थमा नहीं और आज भी है अतिक्रमण जारी
 

पढ़ते रहिए — "पंचशील नगर का सच"


— रिपोर्टिंग: मनोज मिश्रा


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