गाड़ियां चुनाव में लगीं, पैसा अब तक नहीं मिला; पुलिस विभाग पर बड़ा सवाल
रांची: चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, मतदान कर्मियों के आवागमन और चुनावी सामग्री के परिवहन के लिए प्रशासन और पुलिस विभाग बड़ी संख्या में निजी वाहनों का अधिग्रहण करते हैं। लेकिन झारखंड में पिछले चुनावों में ड्यूटी करने वाले कई वाहन मालिक आज भी अपने किराये के भुगतान का इंतजार कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनाव और झारखंड विधानसभा चुनाव में जिला प्रशासन द्वारा अधिग्रहित वाहनों का भुगतान अधिकांश मामलों में कर दिया गया है। वहीं पुलिस विभाग के माध्यम से लिए गए कई ट्रक, बस और अन्य वाहनों का किराया अब भी लंबित बताया जा रहा है।
झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने एम भारत 24 न्यूज़ लाइव से बातचीत में कहा कि चुनाव से जुड़े सभी मदों का भुगतान जिला प्रशासन को कर दिया गया है और किसी भी जिले का, कोई भी मद का एक रुपया भी बकाया नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस लाइन के माध्यम से लिए गए वाहनों के भुगतान संबंधी सवाल का जवाब डीजीपी कार्यालय या गृह विभाग ही दे सकता है।
वाहन मालिकों का कहना है कि उन्होंने लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व में अपनी गाड़ियां उपलब्ध कराईं, लेकिन चुनाव खत्म हुए कई महीने बीत जाने के बाद भी उन्हें उनका भुगतान नहीं मिला है। लोहरदगा, रांची समेत कई जिलों के वाहन संचालकों ने दावा किया है कि पुलिस विभाग के पास उनका किराया लंबित है।
वाहन मालिकों के अनुसार बकाया राशि करोड़ों रुपये तक पहुंच चुकी है। उनका कहना है कि जब चुनावी खर्च के अन्य मदों का भुगतान हो चुका है, तो फिर पुलिस विभाग के माध्यम से लिए गए वाहनों का भुगतान क्यों नहीं किया जा रहा है।
एम भारत 24 न्यूज़ लाइव ने इस मामले में झारखंड पुलिस के शीर्ष अधिकारियों का पक्ष जानने की कोशिश की। डीजीपी कार्यालय से संपर्क भी किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी।
अब वाहन मालिकों की निगाहें पुलिस मुख्यालय और गृह विभाग पर टिकी हैं। उनका कहना है कि चुनावी ड्यूटी में सहयोग देने वालों का बकाया भुगतान जल्द किया जाना चाहिए, ताकि उन्हें वर्षों से लंबित अपने मेहनताने के लिए और इंतजार न करना पड़े।
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रिपोर्टिंग -- मनोज मिश्रा
Part 2 में जानेंगे क्या पुलिस विभाग को आवंटन मिला है? अगर मिला है तो वाहन मालिकों को भुगतान क्यों नहीं दिया जा सका है? अगर नहीं मिला है तो कब तक आवंटन मिलेगा?


