एक जमीन, दो विभाग; म्यूटेशन में उलझा BSNL टेलीफोन भवन, जीपीओ अब भी पीछे
रांची: अल्बर्ट एक्का चौक स्थित BSNL टेलीफोन भवन की जमीन का म्यूटेशन अब तक नहीं हो सका है। कभी पोस्ट ऑफिस और टेलीफोन एक्सचेंज एक ही जमीन पर संचालित होते थे, लेकिन झारखंड राज्य बनने के बाद दोनों विभाग अलग हो गए। आज दोनों के भवन, परिसर और चारदीवारी अलग-अलग हैं, फिर भी जमीन का म्यूटेशन नहीं हो पाया है।
जानकारी के अनुसार BSNL टेलीफोन भवन ने अपनी जमीन के म्यूटेशन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर दिया है। वहीं प्रधान डाकघर (जीपीओ) ने अब तक ऑनलाइन आवेदन भी नहीं किया है। इस तरह म्यूटेशन की प्रक्रिया में BSNL टेलीफोन भवन डाक विभाग से आगे है।
हालांकि आवेदन करने के बाद भी BSNL टेलीफोन भवन के सामने एक तकनीकी अड़चन खड़ी हो गई है। राजस्व विभाग का कहना है कि म्यूटेशन के लिए सिर्फ आवेदन करना पर्याप्त नहीं है। विभाग को वर्ष 2001 की गजट अधिसूचना और जमीन के बंटवारे से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी उपलब्ध कराने होंगे। साथ ही प्रधान डाकघर से आवश्यक अनुमति भी लेनी होगी।
एम भारत 24 न्यूज लाइव से बातचीत में बीएसएनएल की महाप्रबंधक सुप्रिया जायसवाल ने बताया कि टेलीफोन भवन की जमीन के म्यूटेशन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर दिया गया है और विभाग आगे की प्रक्रिया पूरी कर रहा है।
वहीं रांची शहर अंचल के अंचलाधिकारी शिव शंकर पांडेय ने कहा कि वर्तमान में प्रधान डाकघर और BSNL टेलीफोन भवन अलग-अलग परिसरों में हैं, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में पहले की ही स्थिति दर्ज है। इसलिए BSNL टेलीफोन भवन को म्यूटेशन के लिए प्रधान डाकघर से अनुमति और वर्ष 2001 का गजट जमा करना जरूरी होगा। इनके बिना म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती।
इस मामले में एक और हैरान करने वाली बात यह है कि जीपीओ की जमीन का भी अब तक म्यूटेशन नहीं हुआ है। इतना ही नहीं, विभाग के पास इस संबंध में स्पष्ट जानकारी भी नहीं दिखती। जब इस मुद्दे पर सवाल पूछे गए तो अधिकारियों की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
झारखंड सर्किल के डाक विभाग के निदेशक डॉ. बी.आई. चौधरी से भी जीपीओ के म्यूटेशन को लेकर जानकारी लेने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने इस विषय पर कुछ भी स्पष्ट कहने से परहेज किया।
अब सवाल यह है कि जब दोनों विभाग वर्षों पहले अलग हो चुके हैं और उनकी जमीन की सीमाएं भी अलग हैं, तो फिर म्यूटेशन की प्रक्रिया अब तक पूरी क्यों नहीं हो सकी। BSNL टेलीफोन भवन ने आवेदन कर पहल तो कर दी है, लेकिन जरूरी दस्तावेजों के अभाव में उसकी प्रक्रिया आगे बढ़ने का इंतजार कर रही है। वहीं जीपीओ ने अब तक आवेदन भी नहीं किया है, जिससे उसका मामला और पीछे नजर आ रहा है।
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रिपोर्टिंग- मनोज मिश्रा


