करोड़ों का नगर निगम मुख्यालय, लेकिन जमीन का म्यूटेशन आज तक नहीं!

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करोड़ों का नगर निगम मुख्यालय, लेकिन जमीन का म्यूटेशन आज तक नहीं!


5 साल से चल रहा है दफ्तर, फिर भी 40 डीड का रिकॉर्ड अधूरा


रांची: राजधानी रांची के कचहरी रोड स्थित रांची नगर निगम (RMC) का भव्य 8 मंजिला मुख्यालय शहर की पहचान बन चुका है। करीब 41 से 48 करोड़ रुपये की लागत से बने इस आधुनिक भवन का उद्घाटन दिसंबर 2020 में हुआ था। "रांची का व्हाइट हाउस" कहे जाने वाले इस भवन से पिछले लगभग पांच वर्षों से नगर निगम का पूरा प्रशासनिक कामकाज संचालित हो रहा है।


लेकिन इस चमकदार इमारत के पीछे एक ऐसा सच छिपा है जो सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जिस जमीन पर नगर निगम का मुख्यालय खड़ा है, उसका आज तक म्यूटेशन नहीं हुआ है।


सीओ ने क्या बताया?


इस संबंध में एम भारत 24 न्यूज़ लाइव से बातचीत में शहरी अंचल के अंचल अधिकारी शिव शंकर पांडेय ने बताया कि नगर निगम मुख्यालय की भूमि के म्यूटेशन के लिए कुल 40 डीड की आवश्यकता है जिसमें नगर निगम की ओर से 25 डीड शहरी अंचल कार्यालय में जमा हो चुकी हैं, जबकि 15 डीड अभी भी जमा होनी बाकी हैं। सभी दस्तावेज प्राप्त होने और उनके सत्यापन के बाद ही म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी।


सबसे बड़ा सवाल — भवन पहले बना या कागज पूरे हुए?


दिसंबर 2020 में भवन का उद्घाटन हो गया। करोड़ों रुपये खर्च हो गए। नगर निगम का पूरा तंत्र वहां से संचालित होने लगा। लेकिन पांच साल बाद भी जमीन का म्यूटेशन नहीं हो पाया।


ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है—


क्या भवन निर्माण से पहले भूमि अभिलेखों की पूरी जांच हुई थी?

यदि 40 डीड जरूरी थीं, तो भवन बनने से पहले इन्हें एकत्र क्यों नहीं किया गया?

आखिर पांच साल बाद भी 15 डीड क्यों लंबित हैं?

क्या सरकारी संस्थानों के लिए भूमि संबंधी नियम अलग हैं?


करोड़ों की इमारत, लेकिन कागज अधूरे


नगर निगम वह संस्था है जो शहर में भवन निर्माण की अनुमति देती है, होल्डिंग टैक्स वसूलती है, नक्शा पास करती है और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करती है। लेकिन सवाल यह है कि जो संस्था दूसरों से कागजी प्रक्रिया पूरी करने की अपेक्षा रखती है, उसके अपने मुख्यालय की जमीन का म्यूटेशन आज तक पूरा क्यों नहीं हुआ?


15 डीड कहां अटकी हैं?


सीओ के बयान के अनुसार अभी भी 15 डीड जमा होनी बाकी हैं। इससे यह प्रश्न और गहरा हो जाता है कि आखिर ये दस्तावेज अब तक क्यों नहीं जुटाए जा सके।

क्या संबंधित विभागों के पास रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है?

क्या फाइलें वर्षों से इधर-उधर घूम रही हैं?

या फिर यह मामला प्रशासनिक सुस्ती और लापरवाही का शिकार रहा है?


एम भारत 24 न्यूज़ लाइव का सवाल


जब नगर निगम का नया मुख्यालय पिछले पांच वर्षों से संचालित हो रहा है, तो उसकी जमीन का म्यूटेशन आज तक क्यों नहीं हुआ?

क्या करोड़ों रुपये की लागत से भवन बनाने से पहले भूमि संबंधी सभी औपचारिकताएं पूरी नहीं होनी चाहिए थीं?

और सबसे महत्वपूर्ण— शेष 15 डीड कब जमा होंगी और म्यूटेशन की प्रक्रिया कब पूरी होगी?

इन सवालों का जवाब अब रांची की जनता जानना चाहती है।


रिपोर्टिंग: मनोज मिश्रा

एम भारत 24 न्यूज़ लाइव

"सवाल जनता के, जवाब व्यवस्था से"

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