केंद्रीय बजट झारखंड के साथ अन्याय का प्रमाण : विनोद कुमार पांडेय
रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने केंद्रीय बजट 2026–27 को झारखंड के प्रति केंद्र सरकार की असंवेदनशीलता और भेदभावपूर्ण नीति का स्पष्ट प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि झारखंड जैसे खनिज-संपन्न और देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले राज्य को एक बार फिर बजट में नजरअंदाज किया गया है।
पांडेय ने आरोप लगाया कि कोल कंपनियों पर झारखंड का 1.36 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बकाया आज भी लंबित है, लेकिन इसके भुगतान को लेकर बजट में कोई ठोस प्रावधान नहीं है। मनरेगा के 60:40 खर्च अनुपात से राज्य पर बढ़े वित्तीय बोझ और जीएसटी युक्तिकरण से हो रही हजारों करोड़ की क्षति पर भी केंद्र सरकार चुप है।
उन्होंने कहा कि कृषि, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और बुनियादी ढांचे जैसे अहम क्षेत्रों में झारखंड को कोई नई योजना या विशेष पैकेज नहीं मिला। न नई रेल परियोजना घोषित हुई और न ही किसानों, मजदूरों, महिलाओं और युवाओं के लिए कोई ठोस पहल। झामुमो ने इस बजट को झारखंड के लिए निराशाजनक बताते हुए केंद्र से समान और न्यायसंगत व्यवहार की मांग की है।


