अग्निवीर बनकर गांव लौटे राकेश उरांव, भव्य स्वागत से गूंजा बड़कीटांड़

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अग्निवीर बनकर गांव लौटे राकेश उरांव, भव्य स्वागत से गूंजा बड़कीटांड़


टंडवा (चतरा): टंडवा प्रखंड के राहम पंचायत स्थित बड़कीटांड़ गांव के युवा राकेश उरांव अग्निवीर का प्रशिक्षण  पूरा कर जब अपने गांव पहुंचे, तो पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बन गया। उनके स्वागत के लिए बच्चे, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में जुटे। "भारत माता की जय" और "वंदे मातरम्" के नारों से पूरा गांव देशभक्ति के रंग में रंग गया।


राकेश उरांव की इस उपलब्धि पर उनकी माता करणी देवी एवं पिता सोमर उरांव सहित पूरा परिवार गौरवान्वित नजर आया। बेटे की सफलता पर मां की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े, जबकि पिता गर्व से अभिभूत दिखे। ग्रामीणों ने फूल-मालाओं, ढोल-नगाड़ों और जयघोष के साथ उनका भव्य स्वागत किया।


ग्रामीणों के अनुसार बड़कीटांड़ गांव से पहली बार कोई युवा अग्निवीर बनकर सेना में शामिल हुआ है। राकेश की सफलता ने क्षेत्र के युवाओं में नया जोश और आत्मविश्वास भर दिया है। उनकी उपलब्धि आज के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।गांववासियों ने कहा कि राकेश उरांव ने अपने परिश्रम, अनुशासन और समर्पण से यह मुकाम हासिल किया है। उनकी सफलता से न केवल परिवार बल्कि पूरा गांव गौरवान्वित महसूस कर रहा है।


इस अवसर पर एम भारत 24 न्यूज़ लाइव के संवाददाता तारकेश्वर गुप्ता ने राकेश उरांव से विशेष बातचीत की। आइये जानते हैं राकेश उरांव ने अपनी सफलता के बारे में क्या बताया?


प्रश्न: आपको सेना में जाने की प्रेरणा कहां से मिली?

राकेश उरांव: मुझे यह प्रेरणा अपने चाचा से मिली। वे भी सेना में भर्ती होना चाहते थे, लेकिन सफल नहीं हो सके। मैंने उनके सपने को अपना सपना बनाया और उसे पूरा करने का प्रयास किया।


प्रश्न: प्रशिक्षण का अनुभव कैसा रहा?

राकेश उरांव: शुरुआती एक-दो महीने थोड़ी कठिनाई महसूस हुई, लेकिन बाद में साथियों और माहौल के साथ तालमेल बैठ गया। उसके बाद प्रशिक्षण का अनुभव काफी अच्छा रहा। आज प्रशिक्षण पूरा कर अपने घर लौटकर बहुत खुशी हो रही है।


प्रश्न: प्रशिक्षण के दौरान सबसे बड़ी चुनौती क्या थी?

राकेश उरांव: सेना में चुनौतियां तो आम बात हैं। जो चुनौतियों का सामना कर लेता है, वही एक सच्चा सैनिक बनता है। संघर्ष से पीछे हटने वाला फौजी नहीं कहलाता।


प्रश्न: सफलता मिलने पर कैसा महसूस हो रहा है?

राकेश उरांव: मैं अत्यंत गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। आप सभी लोगों का प्यार और सम्मान मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। गांववासियों ने ढोल-बाजों के साथ जो स्वागत किया, उसके लिए मैं सदैव उनका ऋणी रहूंगा। मेरा सपना पूरा हुआ है और यह मेरे जीवन का सबसे यादगार क्षण है।


प्रश्न: युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे?

राकेश उरांव: मैं अपने गांव और क्षेत्र के युवाओं से कहना चाहता हूं कि वे नशे से दूर रहें, समय का सदुपयोग करें, नियमित पढ़ाई करें और कड़ी मेहनत करें। ईमानदारी और लगन से किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता। सफलता अवश्य मिलती है।


रिपोर्ट: तारकेश्वर गुप्ता

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