"मम्मी छोड़कर गई है... लेने आएगी"
रांची: राजधानी रांची के सुखदेव नगर थाना क्षेत्र स्थित मॉल ऑफ रांची के मुख्य प्रवेश द्वार के पास गुरुवार रात जो दृश्य देखने को मिला, उसने बच्चों की सुरक्षा, परवरिश और सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रात के अंधेरे में करीब 12-13 साल की एक बच्ची अकेली बैठी थी। उसके पास न कोई अभिभावक था, न कोई परिचित। वह बस एक ही बात दोहरा रही थी— "मम्मी छोड़कर गई है, लेने आएगी..." लेकिन रात गहरी होती गई और उसे लेने कोई नहीं पहुंचा।
मॉल ऑफ रांची के सुरक्षा कर्मियों की नजर जब बच्ची पर पड़ी तो उन्होंने उससे बातचीत की। बच्ची काफी घबराई हुई थी और ठीक से जवाब भी नहीं दे पा रही थी। जब सुरक्षा कर्मियों ने पूछा कि वह यहां क्यों बैठी है और उसके साथ कौन है, तो उसने बताया कि उसकी "मम्मी" उसे यहां बैठाकर गई है और कहा है कि वह वापस आकर उसे ले जाएगी। लेकिन काफी देर इंतजार के बावजूद जब कोई नहीं आया, तब मॉल प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए रात करीब 10 बजे सुखदेव नगर थाना को सूचना दी।
सूचना मिलते ही पीसीआर टीम मौके पर पहुंची और बच्ची से पूछताछ शुरू की। शुरुआती बातचीत में बच्ची अपने बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं बता पा रही थी। वह अपना पता नहीं बता सकी, यह भी नहीं बता सकी कि वह किस इलाके में रहती है। काफी देर तक समझाने-बुझाने और पूछताछ के बाद उसने अपना नाम माधुरी सोनी (बदला नाम) बताया।
पूछताछ के दौरान बच्ची के बयान लगातार बदलते रहे। पहले उसने कहा कि उसकी मां उसे यहां छोड़कर गई है। फिर कुछ देर बाद उसने कहा कि उसके पिता बाहर काम करने गए हैं और उसकी मां की मौत हो चुकी है। बाद में उसने एक और बात बताई, जिसने पूरे मामले को और उलझा दिया। उसने कहा कि जिस महिला के घर में वह काम करती है, उसी को वह "मम्मी" कहती है। बच्ची की बातों से साफ लग रहा था कि वह मानसिक रूप से काफी उलझन में है या फिर किसी कारणवश खुलकर कुछ नहीं बता पा रही है।
पुलिस ने जब उससे पूछा कि क्या वह किसी परिचित जगह तक पहुंचा सकती है, तो उसने बताया कि वह अपनी एक सहेली का घर पहचानती है। इसके बाद पीसीआर टीम उसे अपने साथ लेकर निकल पड़ी। बच्ची के बताए रास्ते पर पुलिस देवी मंदिर के पीछे स्थित इलाके में पहुंची, जहां स्थानीय लोगों से पूछताछ की गई। कुछ लोगों ने बच्ची को पहचान लिया और बताया कि वह लाल अस्पताल के पास स्थित एक फ्लैट में रहती है।
इसके बाद पुलिस बच्ची की सहेली के घर पहुंची। काफी देर तक दरवाजा खटखटाने के बाद घर के लोगों ने जानकारी दी कि बच्ची कहां रहती है। इस बीच आसपास के लोगों ने भी बच्ची के बारे में जानकारी दी। स्थानीय लोगों ने बताया कि माधुरी देवी मंदिर के पास स्थित एक छोटी दुकान में भी काम करती है। यह जानकारी सामने आते ही बाल श्रम को लेकर भी सवाल उठने लगे।
एक स्थानीय व्यक्ति की मदद से पुलिस उस फ्लैट तक पहुंची, जहां बच्ची के रहने की बात कही जा रही थी। फ्लैट पहुंचने के दौरान माधुरी खुद रास्ता दिखा रही थी। वह बेसमेंट से होकर लिफ्ट तक पहुंची, लिफ्ट का गेट भी उसने खुद सही तरीके से लगाया और फिर सभी तीसरी मंजिल पर पहुंचे। लेकिन यहां एक ऐसी बात सामने आई, जिसने पुलिस को भी सोचने पर मजबूर कर दिया।
जिस घर को वह बता रही थी, उसके दरवाजे तक पहुंचने के बाद वह अंदर जाने से हिचकिचाने लगी। वह दरवाजे के बाहर ही रुक गई और घर में प्रवेश करने को तैयार नहीं दिखी। पुलिस और स्थानीय लोगों ने भी महसूस किया कि बच्ची किसी वजह से उस घर में जाने को लेकर सहज नहीं थी।
दरवाजा खुलने पर घर में मौजूद व्यक्ति ने बच्ची को पहचान लिया। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनकी माँ ने माधुरी को बचपन में गोद लिया था और माधुरी का कोई अपना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपनी मां से अलग रहते हैं और उनकी मां अपर बाजार इलाके में रहती हैं।
हालांकि पुलिस के मन में सबसे बड़ा सवाल यही था कि यदि बच्ची को बचपन से पाल-पोसकर बड़ा किया गया है, तो आखिर उसे रात में माल ऑफ रांची के बाहर क्यों छोड़ा और फिर वापस लेने क्यों नहीं आई?
यह पूरा घटनाक्रम कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या बच्ची को जानबूझकर मॉल के बाहर छोड़ दिया गया था? क्या वह किसी पारिवारिक विवाद का शिकार है? क्या उससे काम कराया जा रहा है? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह कि जिस घर में वह रह रही थी, वहां वापस जाने में वह सहज क्यों नहीं दिख रही थी?
फिलहाल सुखदेव नगर थाना पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। लेकिन एक मासूम बच्ची का रात में घंटों तक मॉल के बाहर अकेले बैठा रहना और फिर घर पहुंचने के बाद भी अंदर जाने से हिचकिचाना, इस कहानी को केवल एक सामान्य घटना नहीं रहने देता। माधुरी की खामोशी और उसके बदलते बयान इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि इस मामले की तह तक पहुंचना बेहद जरूरी है।
-- रिपोर्टिंग मनोज मिश्रा


