पोक्सो मामलों में लापरवाही नहीं, संवेदनशील व सटीक अनुसंधान जरूरी : नीरजा असरी
लोहरदगा। बच्चों के विरुद्ध अपराधों के अनुसंधान में विशेष सतर्कता और संवेदनशीलता बरतने की आवश्यकता है। उक्त बातें डीजे द्वितीय सह महिला अपराध स्पेशल कोर्ट की न्यायाधीश नीरजा असरी ने कही। वे 31 जनवरी 2026 को सिविल कोर्ट परिसर स्थित सभागार में आयोजित एक दिवसीय मल्टी स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन कार्यशाला को संबोधित कर रही थीं। यह कार्यशाला झालसा रांची के निर्देशानुसार एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार लोहरदगा राजकमल मिश्रा के मार्गदर्शन में आयोजित की गई।
कार्यशाला में पोक्सो अधिनियम, जूविनाइल जस्टिस एक्ट, बाल कल्याण समिति की भूमिका एवं अनुसंधान प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा हुई। नीरजा असरी ने कहा कि अनुसंधान में छोटी-छोटी त्रुटियों के कारण आरोपी छूट जाते हैं, इसलिए साक्ष्य संकलन, जब्ती सूची और न्यायालय में गवाही पूरी मजबूती से प्रस्तुत की जानी चाहिए।
एसडीपीओ किस्को वेदांत शंकर ने पोक्सो मामलों में त्वरित कार्रवाई, एफआईआर, मेडिकल जांच और सही धाराएं लगाने पर जोर दिया। डालसा सचिव राजेश कुमार ने जूविनाइल जस्टिस एक्ट, बाल कल्याण समिति के कार्यों और पंजीयन से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी। कार्यशाला में पुलिस पदाधिकारी, चिकित्सक, अधिवक्ता, पीएलवी सहित कई लोग उपस्थित थे।


