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“जय श्रीराम और राम कहने पर कांग्रेस उछल पड़ती है, अब ‘जी राम जी’ से भी समस्या” — बाबूलाल मरांडी

 

“जय श्रीराम और राम कहने पर कांग्रेस उछल पड़ती है, अब ‘जी राम जी’ से भी समस्या” — बाबूलाल मरांडी

रांची | भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष ने आज प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को पहले “जय श्रीराम” और “राम” शब्द से समस्या थी और अब ‘जी राम जी’ योजना से भी परेशानी हो रही है। यह दर्शाता है कि कांग्रेस की राजनीति अब पूरी तरह भ्रम, हताशा और नकारात्मक सोच पर आधारित हो चुकी है।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि कांग्रेस जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है, जबकि जी राम जी का सीधा अर्थ अंत्योदय, गांव, गरीब, किसान और मजदूरों का कल्याण है। यह योजना महात्मा गांधी के सपनों के रामराज्य की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है, जिसका उद्देश्य भ्रष्टाचार-मुक्त ग्राम विकास सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि मनरेगा समय के साथ भ्रष्टाचार और लूट का केंद्र बन गया था। कई सुधार प्रयासों के बावजूद योजनाएं जमीन पर सही तरीके से लागू नहीं हो पा रही थीं। इसी स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने विकसित भारत 2047 के संकल्प को पूरा करने के लिए विकसित भारत ‘जी राम जी’ योजना लाने का निर्णय लिया।

मरांडी ने आरोप लगाया कि झारखंड में मनरेगा घोटालों ने रिकॉर्ड बनाया है। खूंटी जिले में 24 करोड़ रुपये के गबन के मामले में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को जेल जाना पड़ा, जो इस भ्रष्टाचार की गंभीरता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि झारखंड के लगभग सभी जिलों में मनरेगा में करोड़ों रुपये के घोटाले उजागर हुए हैं। इतना ही नहीं, वित्तीय वर्ष 2025–26 में देश के 23 राज्यों की निगरानी में यह सामने आया कि कागजों पर ऐसे कार्य दिखाए गए जिनका जमीन पर कोई अस्तित्व नहीं था। श्रम आधारित कार्यों में मशीनों का बड़े पैमाने पर उपयोग और 40 प्रतिशत तक कमीशनखोरी के मामले भी सामने आए।

उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के बाद केवल 7.61 प्रतिशत परिवार ही 100 दिन का रोजगार पूरा कर सके। 99 प्रतिशत तक ई-भुगतान के बावजूद डिजिटल उपस्थिति दर्ज नहीं की गई, जिससे पैसों का गबन होता रहा और कार्य धरातल पर नहीं उतरे।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि इन्हीं खामियों को दूर करने के लिए विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) नामक नया अधिनियम लाया गया है। यह 20 वर्ष पुराने मनरेगा का विकसित और व्यापक मॉडल है, जिसमें ग्रामीण श्रमिकों को 100 दिन के बजाय 125 दिन के कार्य दिवस की गारंटी दी गई है।

उन्होंने बताया कि इस अधिनियम में चार प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस किया गया है—

  • जल संरक्षण से जुड़े निर्माण कार्य,
  • ग्रामीण बुनियादी ढांचे का विकास, जिसमें सड़कों का निर्माण शामिल है,
  • रोजगार सृजन से जुड़े निर्माण कार्य, जैसे भंडारण संरचनाएं,
  • पर्यावरणीय संकट को कम करने वाले कार्य, जैसे मिट्टी कटाव रोकना, जल संरक्षण और बाढ़ से बचाव।

मरांडी ने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए इस अधिनियम में एआई आधारित धोखाधड़ी पहचान, केंद्र एवं राज्य स्तरीय निगरानी समिति, जीपीएस मोबाइल आधारित मॉनिटरिंग, साप्ताहिक सार्वजनिक प्रकटीकरण और प्रत्येक पंचायत में वर्ष में दो बार सोशल ऑडिट का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अधिनियम में किसान और मजदूर दोनों के हितों का ध्यान रखा गया है। कृषि सीजन के दौरान 60 दिन का ‘नो-वर्क पीरियड’ रखा गया है, ताकि मजदूर कृषि कार्य में अधिक मजदूरी कमा सकें और किसानों को समय पर श्रमिक मिल सकें। शेष अवधि में 125 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया गया है। काम नहीं मिलने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान किया गया है। योजना में केंद्र और राज्य का व्यय अनुपात 60:40 तय किया गया है।

कांग्रेस पर हमला तेज करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस गांव, गरीब और किसान विरोधी पार्टी है। उसे भ्रष्टाचार रुकने, मजदूरों को 125 दिन काम मिलने, बेरोजगारी भत्ता मिलने और योजना में “राम” शब्द आने से परेशानी हो रही है।

उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता इस नए अधिनियम की खूबियों को घर-घर तक पहुंचाएंगे और कांग्रेस के दुष्प्रचार का पर्दाफाश करेंगे।

प्रेस वार्ता में प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद, किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष पवन साहू, प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव और सह मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह भी उपस्थित थे।

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