बिजुपाड़ा टोल प्लाजा पर 52% टोल वृद्धि का असर: 8 महीने में ही ठेकेदार ने किया सरेंडर

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बिजुपाड़ा टोल प्लाजा पर 52% टोल वृद्धि का असर: 8 महीने में ही ठेकेदार ने किया सरेंडर


विशेष रिपोर्ट | एम भारत 24 न्यूज़ लाइव


रांची से कुडू तक फोरलेन सड़क बनने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग-39 पर बीजूपाड़ा टोल प्लाजा स्थापित किया गया था, ताकि सड़क निर्माण पर हुए खर्च की भरपाई के साथ राजस्व संग्रह किया जा सके। लेकिन बीजूपाड़ा टोल प्लाजा लगातार विवादों और चुनौतियों के कारण चर्चा में रहा है। स्थिति यह है कि टोल संचालन का जिम्मा लेने वाली कंपनियां अपना अनुबंध पूरा होने से पहले ही काम छोड़ने को मजबूर हो रही हैं।


ताजा मामला आशीष जायसवाल कंपनी का है, जिसने टोल संचालन का अनुबंध मिलने के महज आठ महीने बाद ही उसे सरेंडर कर दिया। सूत्रों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था की कमी, आसपास मूलभूत सुविधाओं का अभाव, स्थानीय स्तर पर होने वाले विवाद और सबसे महत्वपूर्ण टोल दरों में हुई 52 प्रतिशत की भारी वृद्धि इसके पीछे की प्रमुख वजहें हैं।

आखिर क्या है 52 प्रतिशत वृद्धि का मामला?


बीजूपाड़ा टोल प्लाजा पर वित्तीय वर्ष 2024-25 में एक कार चालक को 75 रुपये टोल शुल्क देना पड़ता था। NHAI के नियमों के अनुसार हर वर्ष 1 अप्रैल से टोल दरों में संशोधन किया जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत वर्ष 2025-26 में टोल शुल्क बढ़कर 80 रुपये हो गया।


लेकिन वर्ष 2026-27 में स्थिति अचानक बदल गई। सामान्य वार्षिक वृद्धि के बजाय 1 मई से नई दरें लागू की गईं, जिसके तहत कार का टोल शुल्क सीधे 80 रुपये से बढ़ाकर 120 रुपये कर दिया गया। यानी एक झटके में लगभग 52 प्रतिशत की वृद्धि।


यह बढ़ोतरी लोगों के बीच चर्चा और नाराजगी का विषय बन गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां एक ओर सड़क की गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतें होती रही हैं, वहीं दूसरी ओर टोल शुल्क में इतनी बड़ी वृद्धि लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने जैसा है।

मुरगू पुल की मरम्मत और टोल वृद्धि का कनेक्शन


सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मुरगू पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद उसकी मरम्मत पर हुए खर्च की भरपाई के लिए टोल दरों में 52 प्रतिशत की वृद्धि की गई। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।


लेकिन इस पूरे मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि नया पुल पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो गया तो इसकी जिम्मेदारी निर्माण एजेंसी या संबंधित कंपनी की होनी चाहिए। ऐसे में मरम्मत का बोझ आम जनता पर डालना कितना उचित है, यह बड़ा प्रश्न है। लोगों का आरोप है कि निर्माण और रखरखाव में हुई खामियों की कीमत अब वाहन चालकों से वसूली जा रही है।


टोल प्लाजा से कितना होता है राजस्व संग्रह?


जानकारी के अनुसार बीजूपाड़ा टोल प्लाजा से प्रतिदिन लगभग 8,000 से 8,500 वाहन गुजरते हैं। इनमें करीब 2,000 वाहनों के मासिक पास बने हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार टोल प्लाजा की दैनिक आय पहले लगभग 7 लाख रुपये थी। 52 प्रतिशत टोल वृद्धि के बाद यह आय बढ़कर लगभग 10 लाख रुपये प्रतिदिन तक पहुंचने का अनुमान है।


हालांकि बढ़ी हुई दरों के बाद टोल प्लाजा पर विवाद और विरोध की घटनाएं भी बढ़ीं। सूत्रों का कहना है कि बढ़ती चुनौतियों और संचालन संबंधी समस्याओं के कारण कंपनी ने अनुबंध सरेंडर करने का फैसला लिया।


फिलहाल क्या है स्थिति?


आशीष जायसवाल कंपनी के अनुबंध छोड़ने के बाद 7 जून से NHAI स्वयं टोल संग्रह का कार्य कर रही है। विभाग द्वारा जल्द ही नए ठेकेदार के चयन के लिए टेंडर जारी किए जाने की तैयारी की जा रही है।


लेकिन जानकारों का मानना है कि मौजूदा हालात में किसी भी नए ठेकेदार के लिए टोल प्लाजा का संचालन आसान नहीं होगा। एक ओर बढ़ी हुई टोल दरों को लेकर जनता की नाराजगी है, तो दूसरी ओर सुरक्षा और संचालन से जुड़ी चुनौतियां भी बनी हुई हैं।


NHAI का पक्ष जानने की कोशिश


इस पूरे मामले में NHAI का पक्ष जानने के लिए परियोजना निदेशक विजय कुमार से लगातार कई दिनों तक फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया। लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब प्राप्त नहीं हो सका।


सवाल उठता है कि यदि किसी पुल के निर्माण या रखरखाव में खामियां हैं, तो उसकी कीमत आम जनता क्यों चुकाए?

रिपोर्टिंग- मनोज मिश्रा

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