रांची | 08 जनवरी 2026
जिला विधिक सेवा प्राधिकार, रांची की ओर से मध्यस्थता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से व्यवहार न्यायालय परिसर में एक दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के दिशा-निर्देश पर किया गया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए न्यायायुक्त, रांची अनिल कुमार मिश्रा-1 ने कहा कि मध्यस्थता के माध्यम से वादों का शीघ्र और सौहार्दपूर्ण निस्तारण संभव है। उन्होंने कहा कि वादों के निस्तारण में मध्यस्थों एवं अधिवक्ताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। मध्यस्थता की संस्कृति को मजबूत करने से न्याय प्रक्रिया तेज होगी और वादकारियों को राहत मिलेगी।
प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय, रांची पवन कुमार-1 ने कहा कि मध्यस्थता के माध्यम से जटिल से जटिल मामलों का भी समाधान संभव है। इससे समय और खर्च दोनों की बचत होती है तथा आपसी सौहार्द भी बना रहता है।
विषयगत प्रथम सत्र में अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय, रांची राजेश कुमार सिंह ने कहा कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य मध्यस्थता के लिए भेजे गए मामलों का त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करना है। इससे लंबित मामलों की संख्या में कमी आएगी और वादकारियों को सुविधा मिलेगी। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों एवं न्यायिक दंडाधिकारियों की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की।
विषयगत द्वितीय सत्र में मध्यस्थ ममता श्रीवास्तव ने मध्यस्थता से होने वाले लाभों की जानकारी दी और इसके व्यावहारिक पक्षों पर प्रकाश डाला।
एक दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन दीप प्रज्वलन कर किया गया। स्वागत भाषण न्यायिक दंडाधिकारी एकता सक्सेना ने दिया, जबकि मंच संचालन डालसा सचिव राकेश रौशन ने किया। कार्यक्रम में न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक दंडाधिकारी, अधिवक्ता, पैनल अधिवक्ता, पब्लिक प्रोजिक्यूटर, कर्मचारी, पीएलवी, मीडियाकर्मी एवं एलएडीसी के सदस्यगण सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

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