पंचशील नगर का सच – भाग 5
नापी, नोटिस और इंतजार का अंत कब?
साल 2025 की नापी और नोटिस भी रही बेकार; मानसून में कई घंटे बंद रहा था NH-75
रांची। 20 जून 2025, शुक्रवार की दोपहर लगभग 2 से 3 बजे के बीच पंचशील नगर चौक का माहौल अचानक बदल गया था। यहां बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। मौके पर तत्कालीन सदर एसडीओ उत्कर्ष कुमार, हेहल अंचल के सीओ घनश्याम कुमार सहित कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। चौक से गुजरने वाले लोगों और स्थानीय निवासियों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। पुलिस और प्रशासन की इतनी बड़ी मौजूदगी देखकर लोगों को लगा कि शायद वर्षों से विवादों और शिकायतों में घिरे नाले के अतिक्रमण के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई होने वाली है।
पड़ताल करने पर पता चला कि पंचशील नगर क्षेत्र में नाले की जमीन पर बने मकानों और दुकानों की नापी की जा रही है। प्रशासन यह जानने का प्रयास कर रहा था कि लगभग 62 फीट चौड़े बताए जाने वाले नाले की भूमि पर कितना अतिक्रमण हुआ है और वास्तविक स्थिति क्या है?
हालांकि, जहां नए लोगों को यह कार्रवाई असाधारण लग रही थी, वहीं क्षेत्र के कई पुराने निवासी इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया मान रहे थे। मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने कहा कि उन्होंने पिछले कई वर्षों में ऐसी कार्रवाई कई बार देखी है। उनके अनुसार नापी होती है, नोटिस जारी किए जाते हैं, दस्तावेज जमा कराए जाते हैं, जांच-पड़ताल भी होती है, लेकिन अंत में मामला आगे बढ़ता हुआ दिखाई नहीं देता।
स्थानीय लोगों का कहना था कि वर्ष 2024 में भी इसी प्रकार नापी की गई थी। कथित अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किए गए थे और उनसे संबंधित दस्तावेज मांगे गए थे। उस समय भी क्षेत्र में यह उम्मीद बनी थी कि शायद अब कोई निर्णायक कार्रवाई होगी। लेकिन समय बीतता गया और स्थिति में कोई बदलाव दिखाई नहीं दिया।
20 जून 2025 की कार्रवाई के दौरान भी लोगों के बीच दो तरह की राय थी। एक वर्ग को विश्वास था कि इस बार प्रशासन गंभीर है और लंबे समय से लंबित मामले में कोई ठोस निर्णय सामने आ सकता है। वहीं दूसरा वर्ग इसे एक और औपचारिक प्रक्रिया मान रहा था। कुछ स्थानीय लोगों ने व्यंग्य करते हुए कहा कि पंचशील नगर में नापी और नोटिस कोई नई बात नहीं है, असली सवाल कार्रवाई का है।
कुछ सप्ताह बाद जब मानसून ने दस्तक दी तो पंचशील नगर चौक की तस्वीर वही थी, बारिश के पानी के साथ नाले का पानी सड़क तक पहुंच गया। कई स्थानों पर जलजमाव की स्थिति बनी और राष्ट्रीय राजमार्ग-75 कई घंटो तक बंद रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि नाले की चौड़ाई कम होने और जलनिकासी व्यवस्था प्रभावित होने के कारण हर वर्ष ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है।
यही वह समय था जब पंचशील नगर, राधा नगर और शांति नगर की समस्याओं को लेकर लगातार समाचार मैंने प्रकाशित किया। जलजमाव, नाले पर कथित अतिक्रमण, प्रशासनिक कार्रवाई, स्थानीय लोगों की शिकायतें और संबंधित अधिकारियों की बात को लेकर लगभग 28 दिनों से अधिक समय तक मैंने लगातार रिपोर्टें प्रकाशित की । इन रिपोर्टों में दस्तावेजों, पुराने अभिलेखों, स्थानीय लोगों के दावों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को विस्तार से सामने लाने का प्रयास किया गया।
लगातार उठ रहे सवालों और प्रकाशित समाचारों के बीच अंचल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए। दस्तावेजों की जांच शुरू हुई और विभिन्न अभिलेखों का मिलान किया गया। प्रस्तुत दस्तावेजों की समीक्षा के बाद अंचल प्रशासन पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुआ। इसके बाद कथित अतिक्रमण से जुड़े तथ्यों को संकलित कर वरीय अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गई तथा आगे की कार्रवाई के लिए पत्राचार किया गया।
बताया जाता है कि इस प्रक्रिया के दौरान कई पुराने रिकॉर्ड, नापी से संबंधित दस्तावेज और भूमि की स्थिति से जुड़े अभिलेखों की भी जांच की गई। हालांकि अंतिम प्रशासनिक निर्णय और उसके परिणाम का इंतजार अब भी बना हुआ है।
आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि नापी हो चुकी है, नोटिस जारी हो चुके हैं, दस्तावेजों की जांच हो चुकी है और मामले में वरीय अधिकारियों को रिपोर्ट भी भेजी जा चुकी है, तो फिर आगे की कार्रवाई कब होगी? क्या वर्षों से उठ रहे सवालों का जवाब मिलेगा? क्या पंचशील नगर के लोगों को हर मानसून में जलजमाव और जाम की समस्या से राहत मिलेगी?
पंचशील नगर के स्थानीय निवासियों का कहना था कि वे अब केवल नापी, नोटिस और जांच की खबरें नहीं सुनना चाहते, बल्कि जमीन पर उसका परिणाम भी देखना चाहते हैं। क्योंकि उनके लिए यह केवल अतिक्रमण का मामला नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी, यातायात, जलनिकासी और सार्वजनिक सुविधा से जुड़ा मुद्दा है।
अगले भाग में...
उपायुक्त का अतिक्रमण स्थल पर आगमन
पढ़ते रहिए — "पंचशील नगर का सच"

