ग्रामीण जरूरतों के अनुसार योजनाओं से सशक्त होगा गांव : मनोहर लाल खट्टर
कार्यशाला की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने की। कार्यक्रम में जिला स्तर पर गठित समितियों के सदस्य, पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि पूर्ववर्ती मनरेगा व्यवस्था में मांग आधारित प्रणाली के कारण कई बार ऐसी योजनाएं बनानी पड़ती थीं, जिनकी जमीनी जरूरत नहीं होती थी। इससे वित्तीय असंतुलन के साथ-साथ श्रम और संसाधनों की बर्बादी होती थी। नए अधिनियम में इन कमियों को दूर करते हुए योजनाओं को ग्राम पंचायत स्तर पर आवश्यकताओं के आधार पर तैयार करने का प्रावधान किया गया है, जिन्हें ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर समेकित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि अधिनियम के तहत वार्षिक रोजगार गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन किया गया है। साथ ही मजदूरों को समय पर मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करने और रोजगार उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान किया गया है।
खट्टर ने कहा कि विकास कार्यों को जल सुरक्षा एवं प्रबंधन, कोर ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका से जुड़ी संरचनाएं और जलवायु प्रभाव को ध्यान में रखकर चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिससे टिकाऊ और संतुलित विकास को बढ़ावा मिलेगा।
भ्रष्टाचार पर नियंत्रण को लेकर उन्होंने कहा कि नए अधिनियम में एआई आधारित निगरानी, जीपीएस ट्रैकिंग, पंचायत और राज्य स्तरीय निगरानी समितियां तथा योजनाओं का नियमित सार्वजनिक प्रकटीकरण जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही केंद्र और राज्यों की भागीदारी 60:40 अनुपात में तय की गई है।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि ग्रामीण भारत का विकास मजबूत नीति और पारदर्शी व्यवस्था से ही संभव है। वहीं कार्यकारी अध्यक्ष एवं सांसद आदित्य साहू ने अधिनियम को गरीब, मजदूर और किसानों के हित में बताया।
कार्यशाला में क्षेत्रीय संगठन महामंत्री नागेंद्र त्रिपाठी और प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम के दौरान मंचस्थ अतिथियों का स्वागत पार्टी पदाधिकारियों द्वारा किया गया।

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