नापी और दस्तावेज़ों के नाम पर खेल या प्रशासनिक मजबूरी

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पंचशील नगर का सच – भाग 4


नापी और दस्तावेज़ों के नाम पर खेल या प्रशासनिक मजबूरी


स्थानीय लोगों का आरोप—“18 सालों से वही नापी, वही कागज, लेकिन अतिक्रमण पर कार्रवाई नहीं”


रांची: वर्ष 2024 में राजधानी रांची में पत्रकारिता की शुरुआत के कुछ दिनों बाद संवाददाता ने एनएच-75 स्थित पंचशील नगर चौक पर नगर निगम की टीम को फीता लेकर नापी करते देखा। पूछने पर बताया गया कि हर बारिश में सड़क पर होने वाले जलजमाव की समस्या के समाधान के लिए नाले और आसपास की जमीन की मापी की जा रही है।


लेकिन मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया अलग - अलग थी। उनका कहना था कि यह प्रक्रिया नई नहीं है। वर्षों से नगर निगम और अंचल प्रशासन नापी करता आ रहा है, दस्तावेज़ मांगता रहा है, लेकिन नाले पर हुए अतिक्रमण को हटाने की दिशा में कोई निर्णायक कार्रवाई अब तक नहीं हुई है।


नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर एक स्थानीय व्यक्ति ने दबी जुबान में कहा, “साहब, 18 सालों से यही होता है। अधिकारी आते हैं, नापी होती है, कागज मांगे जाते हैं, फाइलें बनती हैं और फिर मामला ठंडा पड़ जाता है। अगर हर साल नापी नहीं होगी, दस्तावेज़ नहीं मांगे जाएंगे तो फिर निगम को पैसा कैसे मिलेगा? हम लोग तो वर्षों से यही देखते आ रहे हैं। अतिक्रमण सबको दिखाई देता है, लेकिन कार्रवाई कोई नहीं करता। इसलिए लोगों के बीच चर्चा है कि नापी की आड़ में भ्रष्टाचार का खेल चलता है।”


हालांकि यह स्थानीय कई व्यक्तियों का व्यक्तिगत आरोप और धारणा है, जिसकी पुष्टि M भारत 24 न्यूज़ लाइव नहीं करता है। लेकिन इस बयान ने कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। आखिर जब अतिक्रमण की शिकायतें वर्षों से दर्ज हैं, नापी पहले भी हो चुकी है और प्रशासन के पास दस्तावेज़ भी उपलब्ध हैं, तो फिर हर साल एक ही प्रक्रिया दोहराने की आवश्यकता क्यों पड़ती है?


इसी बीच एक शाम हुई तेज बारिश ने पंचशील नगर चौक की वास्तविक स्थिति को सामने ला दिया। चौक पर पानी इस कदर भर गया कि सैकड़ों वाहन घंटों तक जाम में फंसे रहे। राजधानी रांची का मुख्य प्रवेश मार्ग तालाब में तब्दील हो गया। एक ओर पिस्का मोड़ और दूसरी ओर पंडरा क्षेत्र तक यातायात प्रभावित हो गया। हालात ऐसे थे कि यह विश्वास करना मुश्किल था कि यह झारखंड की राजधानी का प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग है।


जब इस स्थिति पर नगर निगम का पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। इसके बावजूद घटनास्थल की स्थिति, स्थानीय लोगों की परेशानी और निगम के जवाबों को शामिल करते हुए समाचार प्रकाशित किया गया।


समाचार प्रकाशित होने के बाद कई स्थानीय लोग दस्तावेज़ लेकर सामने आए। उनका कहना था कि नाले पर हुए अतिक्रमण को हटाने और जलजमाव की समस्या के समाधान के लिए उन्होंने नगर निगम को आवेदन दिया है। उन्हीं शिकायतों के आधार पर एक बार फिर नापी की प्रक्रिया शुरू हुई थी।


मामले की पड़ताल आगे बढ़ी तो तत्कालीन नगर निगम प्रशासक संदीप कुमार से कई बार बातचीत की गई। अतिक्रमण, नाले की जमीन और जलनिकासी व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर समाचार प्रकाशित किए गए। इसी दौरान एक और तेज बारिश के बाद संदीप कुमार स्वयं पंचशील नगर चौक पहुंचे और हालात का निरीक्षण किया।


स्थानीय लोगों के अनुसार यह पहला अवसर था जब कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचकर समस्या की जड़ को समझने का प्रयास कर रहा था। निरीक्षण के दौरान अतिक्रमण और जल निकासी की बाधाओं को देखा गया तथा कुछ अस्थायी समाधान भी किए गए। इससे लोगों में उम्मीद जगी कि अब वर्षों से चली आ रही समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा।


लेकिन कुछ ही समय बाद संदीप कुमार का तबादला हो गया और मामला फिर ठंडे बस्ते में चला गया। फाइलें चलती रहीं, चर्चाएं होती रहीं, लेकिन अतिक्रमण और जलजमाव की समस्या जस की तस बनी रही।


मामला भले ही प्रशासनिक गलियारों में शांत पड़ गया हो, लेकिन इस मुद्दे को लेकर सवाल उठाने का सिलसिला नहीं रुका। संवाददाता मनोज मिश्रा की कलम लगातार चलती रही, दस्तावेज़ सामने आते रहे और प्रशासन से जवाबदेही के सवाल पूछे जाते रहे।


अगले भाग में...

  2025 में फिर एक बार नापी

पढ़ते रहिए — "पंचशील नगर का सच"


दस्तावेज़ बोलेंगे, तथ्य सामने आएंगे। 


— रिपोर्टिंग: मनोज मिश्रा

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