बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान, अभिभावकों से बेटियों को शिक्षित करने की अपील
रांची | 07 जनवरी 2026
जिला विधिक सेवा प्राधिकार, रांची की ओर से बाल विवाह की रोकथाम को लेकर प्रेमाश्रय, रांची में विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के दिशा-निर्देश पर तथा न्यायायुक्त, रांची अनिल कुमार मिश्रा-1 के नेतृत्व में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा संचालित आशा अभियान के अंतर्गत बाल विवाह के विरुद्ध 100 दिवसीय विशेष अभियान का हिस्सा था। इसमें पीएलवी साहिष्ता प्रवीण, संगीता देवी, संगीता सिंह और पिंकु कुमारी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
पीएलवी साहिष्ता प्रवीण ने बताया कि भारत में बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 लागू है, जिसके अनुसार लड़के की न्यूनतम विवाह आयु 21 वर्ष और लड़की की 18 वर्ष तय है। इससे कम आयु में विवाह कराना कानूनन अपराध है। पीएलवी संगीता देवी ने कहा कि यह कानून बाल विवाह को रद्द करने योग्य मानता है और पीड़ित पक्ष बालिग होने के दो वर्ष के भीतर न्यायालय में विवाह निरस्त कराने का आवेदन दे सकता है।
पीएलवी पिंकु कुमारी ने बताया कि न्यायालय को संभावित बाल विवाह रोकने के लिए निषेधाज्ञा जारी करने, बालक या बालिका की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा जरूरत पड़ने पर संरक्षण गृह में रखने का अधिकार है। वहीं पीएलवी संगीता सिंह ने कहा कि बाल विवाह की जानकारी मिलते ही जिला विधिक सेवा प्राधिकार, चाइल्डलाइन-1098 या नजदीकी पुलिस थाना को सूचित करना हर नागरिक का कानूनी और नैतिक दायित्व है। उन्होंने टॉल फ्री नंबर 15100 की जानकारी भी दी।
कार्यक्रम के अंत में पंपलेट और लीफलेट का वितरण किया गया तथा आगामी 14 मार्च को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की जानकारी दी गई। यह जानकारी डालसा सचिव राकेश रौशन ने दी।


