रांची | कोर्ट रिपोर्ट
दहेज प्रताड़ना से जुड़े करीब नौ साल पुराने एक मामले में अदालत ने अभियोजन पक्ष को बड़ी राहत देते हुए जांच अधिकारी (IO) की गवाही दोबारा कराने की अनुमति प्रदान की है। यह आदेश रातू थाना कांड संख्या 07/17 से संबंधित मामले में न्यायिक दंडाधिकारी-IX की अदालत द्वारा पारित किया गया।
मामले में पीड़िता के पति अमित कुमार सिन्हा सहित कुल छह आरोपी ट्रायल का सामना कर रहे हैं। अभियोजन की ओर से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 311 के तहत याचिका दायर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि निष्पक्ष न्याय के लिए जांच अधिकारी की गवाही अत्यंत आवश्यक है। याचिका में यह भी बताया गया कि पूर्व में परिस्थितिवश और अनजाने में जांच अधिकारी का परीक्षण नहीं हो सका, जिससे अभियोजन का पक्ष पूरी तरह सामने नहीं आ पाया।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने याचिका का विरोध करते हुए दलील दी कि अभियोजन जानबूझकर मामले को अनावश्यक रूप से लंबा खींचना चाहता है। हालांकि, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद अदालत ने माना कि निष्पक्ष सुनवाई के हित में जांच अधिकारी की गवाही आवश्यक है।
अदालत ने अभियोजन को निर्देश दिया है कि जांच अधिकारी का परीक्षण केवल दो निर्धारित तिथियों के भीतर पूरा किया जाए। इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 15 जनवरी 2026 तय की गई है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आरोपियों के बयान दर्ज होने के बाद ही जांच अधिकारी की गवाही कराई जाएगी।
गौरतलब है कि पीड़िता ने आरोप लगाया है कि उसकी शादी वर्ष 2012 में हुई थी, जिसमें उसके माता-पिता ने लगभग 15 लाख रुपये का घरेलू सामान और गहने दिए थे। इसके बावजूद ससुराल पक्ष कम दहेज मिलने का ताना देकर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करता रहा। आरोप है कि ससुराल वालों ने अतिरिक्त पांच लाख रुपये नकद की मांग भी की थी।


