मनसुख मांडविया ने गर्मी से संबंधित बीमारियों के प्रबंधन के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी तैयारियों की समीक्षा की

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नई दिल्ली : हीटवेव (अत्यधिक गर्मी) के बेहतर प्रबंधन के लिए लोगों में जागरूकता पैदा करने की दिशा में निरंतर प्रयास आवश्यक है क्योंकि प्रभावी समाधान से कारगर प्रबंधन होता है: डॉ. मांडविया मृत्यु और मामलों सहित हीटवेव पर फील्ड स्तर के आंकड़े साझा करने के लिए राज्यों से इनपुट के साथ एक केंद्रीय डेटाबेस बनाने के महत्व पर बल दिया,  ताकि स्थिति का वास्तविक आकलन किया जा सके. केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा है कि हीटवेव (अत्यधिक गर्मी) के बेहतर प्रबंधन के लिए लोगों में जागरूकता पैदा करने की दिशा में निरंतर प्रयास आवश्यक हैं क्योंकि प्रभावी समाधान से कारगर प्रबंधन होता है। डॉ. मनसुख मांडविया गर्मी से संबंधित बीमारी के प्रबंधन के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी तैयारियों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। समीक्षा बैठक में केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार और नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वी के पॉल भी उपस्थित थे। डॉ. मांडविया ने जमीनी स्तर पर सटीक आंकड़ों के अभाव के बारे में मृत्यु और मामलों सहित हीटवेव पर फील्ड स्तर के डेटा को साझा करने के लिए राज्यों के इनपुट के साथ एक केंद्रीय डेटाबेस बनाने के महत्व पर बल दिया ताकि स्थिति का वास्तविक मूल्यांकन किया जा सके। उन्होंने राज्यों में आईएमडी अलर्ट प्राप्त होते ही समय पर कार्रवाई के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रोकथाम के उपायों पर लोगों के बीच समय पर, अग्रिम और व्यापक जागरूकता अत्यधिक गर्मी के गंभीर प्रभाव को कम करने में बहुत सहायक होगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों को बेहतर समन्वय और समझ के लिए राज्यों के साथ बैठक करने की सलाह दी। उन्होंने गर्मी से संबंधित बीमारियों के कुशल प्रबंधन में सहयोगी प्रयासों के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. भारती प्रवीण पवार ने लोगों के बीच सूचना और जागरूकता अभियानों के लिए राज्य स्तरीय एवं जिला स्तरीय समितियों के गठन पर बल दिया। उन्होंने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को वाटर कूलर, आइस पैक तथा अन्य आधारभूत आवश्यकताओं से लैस करने के महत्व को बताया। उन्होंने राज्यों को हीटवेव के दुष्प्रभावों को दूर करने के लिए राज्य कार्य योजनाओं को क्षेत्र स्तर पर लागू करने में तेजी लाने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। डॉ. वी. के. पॉल ने राज्य स्तर पर पालन किए जा रहे दिशानिर्देशों की एक चेकलिस्ट सुनिश्चित करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने वेबिनार और अन्य तरीकों से उपचार संबंधी प्रोटोकॉल के बारे में जागरूकता फैलाने पर बल दिया। उन्होंने गर्मी से संबंधित मामलों और बीमारी पर प्रत्येक राज्य से डेटा का भंडार बनाने पर भी जोर दिया। भारत में समग्र हीटस्ट्रोक पूर्वानुमान, पैटर्न, जलवायु विज्ञान एवं संवेदनशील क्षेत्रों और भारत में हीटवेव के सर्वाधिक संभावित क्षेत्रों की एक विस्तृत स्थिति व विश्लेषण भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अधिकारियों द्वारा किया गया था। इसमें वर्षा पैटर्न, आर्द्रता तथा अल-नीनो से ईएनएसओ में संक्रमण के पूर्वानुमान को शामिल किया गया था। यह बताया गया कि 23 राज्यों में हीट एक्शन प्लान को अद्यतन किया गया है जबकि लगभग 100 जिलों में हीटवेव जागरूकता सृजन पर कार्रवाई अभियान चलाया गया है। कमजोर वर्गों में गर्मी से संबंधित बीमारी (एचआरआई) पर विशेष जोर देने के साथ, हीट स्ट्रोक के मामलों और मृत्यु की निगरानी के लिए एसओपी तथा गर्मी के मौसम से पहले और उसके दौरान तैयारी की योजना बनाई जाएगी। समीक्षा बैठक में यह बताया गया कि केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव द्वारा हाल ही में सभी मुख्य सचिवों को परामर्श जारी किया गया है, जिसमें गर्मी के प्रभाव और मामलों के प्रबंधन के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं की कारगर तैयारी के लिए गर्मी से संबंधित बीमारियों पर राष्ट्रीय कार्य योजना के राज्यों के अनुपालन का अनुरोध किया गया है। राज्यों को जनता के लिए आवश्यक दवाओं, इन्ट्रावेनस तरल पदार्थों, आइस-पैक, ओआरएस, पेयजल के साथ-साथ आईईसी क्रियाकलापों के संदर्भ में स्वास्थ्य सुविधा की तैयारी की समीक्षा करने की भी सलाह दी गई थी। यह भी बताया गया कि गर्मियों के महीनों के दौरान सामान्य आबादी के साथ-साथ कमजोर लोगों को क्या करें और क्या न करें राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) द्वारा जारी किया गया है। मौके पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्री अपूर्व चंद्रा,  स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. राजीव बहल,  डीजीएचएस के महानिदेशक डॉ. अतुल गोयल,  सुश्री एल एस चांगसन एएस और एमडी (परिवार कल्याण मंत्रालय), श्रीमती रोली सिंह, एएस (परिवार कल्याण मंत्रालय), आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र,  श्री कमल किशोर, सदस्य और प्रमुख, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण; एम्स नई दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर एम. श्रीनिवास और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. सुभाष गिरि भी उपस्थित थे।

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