हिंडाल्को के 'घटिया' कंबलों पर मचा घमासान: जिला प्रशासन ने बांटने से किया इनकार, कंपनी ने झाड़ा पल्ला

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हिंडाल्को के 'घटिया' कंबलों पर मचा घमासान: जिला प्रशासन ने बांटने से किया इनकार, कंपनी ने झाड़ा पल्ला

लोहरदगा: औद्योगिक दिग्गज हिंडाल्को कंपनी द्वारा सामाजिक सरोकार (CSR) के तहत जिला प्रशासन को सौंपे गए 1000 कंबलों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कड़कड़ाती ठंड में गरीबों को राहत देने के उद्देश्य से दिए गए इन कंबलों की गुणवत्ता पर जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग ने गंभीर सवाल उठाए हैं।

प्रशासन का कड़ा रुख: "नहीं बांटेंगे घटिया कंबल"

मामला तब गरमाया जब समाज कल्याण विभाग और जिले के शीर्ष अधिकारियों ने कंबलों का निरीक्षण किया। अधिकारियों के अनुसार, कंबलों की गुणवत्ता बेहद खराब और निम्न स्तर की है। प्रशासन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इतनी 'घटिया' सामग्री को सरकारी बैनर तले नहीं बांटा जाएगा, क्योंकि यह गरीबों के साथ मजाक के समान है। प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए हिंडाल्को प्रबंधन को आदेश दिया था कि वे इन कंबलों को तुरंत सरकारी भवन से हटा लें।

भवन में डंप हैं कंबल, आदेश बेअसर

ताजा स्थिति यह है कि प्रशासन के स्पष्ट आदेश के बावजूद ये 1000 कंबल अब भी जिला प्रशासन के भवन में ही ज्यों के त्यों पड़े हुए हैं। खबर लिखे जाने तक कंपनी ने इन्हें हटाने की जहमत नहीं उठाई है, जो प्रबंधन की उदासीनता को दर्शाता है।

पाखर में खपाने की तैयारी?

इसी बीच सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर सामने आ रही है कि जिला प्रशासन द्वारा दुत्कारे जाने के बाद अब हिंडाल्को प्रबंधन इन घटिया कंबलों को पाखर में आयोजित होने वाले किसी अन्य कार्यक्रम के माध्यम से खपाने की जुगत में लगा है। चर्चा है कि प्रशासन के बैनर तले दाल न गलने पर अब कंपनी इसे अपने निजी आयोजनों में बांटकर खानापूर्ति करना चाहती है।

M Bharat 24 News की पड़ताल और कंपनी का बचाव

M Bharat 24 News Live के विशेष संवाददाता ने जब इस लापरवाही पर हिंडाल्को प्रबंधन से सवाल पूछे, तो स्थानीय अधिकारी बचते नजर आए। अंततः रांची स्थित मीडिया प्रतिनिधि राजीव ने फोन पर पक्ष रखते हुए कहा:

 "हिंडाल्को का 60 वर्षों का इतिहास काबिल-ए-तारीफ रहा है। घटिया कंबल सप्लाई नहीं हुए होंगे, फिलहाल हमें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।"

गरीबों के हक के साथ खिलवाड़?

एक तरफ भीषण ठंड का प्रकोप है, वहीं दूसरी तरफ औद्योगिक घराने और प्रशासन के बीच गुणवत्ता को लेकर ठन गई है। प्रशासन का कहना है कि वे गरीबों को ऐसी सामग्री नहीं दे सकते जो मानकों पर खरी न उतरे। अब देखना यह होगा कि क्या कंपनी अपनी साख बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाती है या विवाद और गहराएगा।



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