बिजली संशोधन बिल के खिलाफ लामबंद हुआ AIPEF; राज्यों से निजीकरण रोकने की अपील

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बिजली संशोधन बिल के खिलाफ लामबंद हुआ AIPEF; राज्यों से निजीकरण रोकने की अपील

विशेष संवाददाता, नई दिल्ली

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित विद्युत (संशोधन) बिल और बिजली क्षेत्र के निजीकरण के प्रयासों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। फेडरेशन ने सभी राज्य सरकारों से अपील की है कि वे 22-23 जनवरी को होने वाली राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में इस बिल का एकजुट होकर कड़ा विरोध करें।

राज्यों की वित्तीय सेहत को खतरा

फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने सभी मुख्यमंत्रियों को भेजे पत्र में चेतावनी दी है कि प्रस्तावित बिल के प्रावधान राज्य बिजली वितरण निगमों (DISCOMs) की वित्तीय स्थिति और देश के संघीय ढांचे के लिए गंभीर खतरा हैं। उन्होंने कहा कि यह बिल निजी कंपनियों को बिना किसी निवेश के सार्वजनिक धन से बने नेटवर्क का उपयोग करने की अनुमति देता है। निजी कंपनियाँ केवल मुनाफे वाले औद्योगिक उपभोक्ताओं को सेवा देंगी, जिससे सरकारी डिस्कॉम गहरे आर्थिक संकट में फँस जाएंगे।

जनता पर बढ़ेगा बोझ

AIPEF के अनुसार, क्रॉस-सब्सिडी खत्म होने से किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं पर 30% से 50% तक बिजली दर वृद्धि का सीधा बोझ पड़ेगा। शैलेन्द्र दुबे ने इसे ‘बैकडोर प्राइवेटाइजेशन’ करार देते हुए कहा कि सार्वजनिक संपत्तियाँ निजी मुनाफे के लिए नहीं सौंपी जा सकतीं।

देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

पत्र में राज्यों से आग्रह किया गया है कि वे बिजली जैसे समवर्ती सूची के विषय पर अपने अधिकारों की रक्षा करें। फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि यदि बिजली जैसी बुनियादी सेवा को निजी हाथों में सौंपने का प्रयास हुआ, तो देशभर के इंजीनियर, कर्मचारी और किसान इसका पुरजोर विरोध करेंगे।



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