
केंद्रीय रेशम बोर्ड के तत्वावधान में बेसिक तसर रेशमकीट बीज संगठन का बिलासपुर में तसर रेशम पर प्रेरण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन
बिलासपुर | केंद्रीय रेशम बोर्ड (CSB) के तत्वावधान में बेसिक तसर रेशमकीट बीज संगठन (BTSSO), बिलासपुर द्वारा 30 दिसंबर 2025 से 6 जनवरी 2026 तक नव-नियुक्त CSB वैज्ञानिकों के लिए तसर रेशम पर प्रेरण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम डॉ. एन. के. भाटिया, निदेशक, CSB-BTSSO, बिलासपुर के नेतृत्व में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य तसर रेशम क्षेत्र में वैज्ञानिक दक्षता, तकनीकी क्षमता तथा क्षेत्रीय कार्यकुशलता को सुदृढ़ करना रहा।
इस गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम में गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, रोग निगरानी एवं प्रबंधन, पोस्ट-कोकून प्रौद्योगिकियाँ, MRMA, प्रौद्योगिकी प्रसार, कोया छंटाई, ग्रेडिंग एवं गुणवत्ता मूल्यांकन जैसे महत्वपूर्ण विषयों को सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक रूप से शामिल किया गया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. जे. पी. पांडेय, वैज्ञानिक-डी, CSB-BTSSO, बिलासपुर ने गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन में रोग निगरानी समिति (DMC) की भूमिका पर व्याख्यान देते हुए रोगों की रोकथाम एवं वैज्ञानिक निगरानी तंत्र पर विशेष जोर दिया। वहीं डॉ. नदाफ, वैज्ञानिक-डी ने बीज अधिनियम (Seed Act) एवं उससे संबंधित विनियामक प्रावधानों पर केंद्रित प्रशिक्षण प्रदान किया, जो रेशमकीट बीज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण है।
इसके अतिरिक्त अशोक कुमार, वैज्ञानिक-बी, CSB-STSC, बिलासपुर ने उन्नत तसर पोस्ट-कोकून प्रौद्योगिकियों, मूल्यवर्धित उप-उत्पादों तथा कोया छंटाई, ग्रेडिंग एवं गुणवत्ता परीक्षण के वैज्ञानिक सिद्धांतों पर विस्तृत जानकारी साझा की। जे. कोमल, वैज्ञानिक-बी, CSB-BTSSO, बिलासपुर ने MRMA एवं प्रौद्योगिकी प्रसार में CSB-BTSSO की भूमिका एवं क्षेत्रीय स्तर पर इसके प्रभाव को रेखांकित किया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन एग्ज़िट टेस्ट, फीडबैक सत्र एवं समूह प्रस्तुतियों के साथ हुआ। प्रतिभागी वैज्ञानिकों ने प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान, व्यावहारिक अनुभव एवं क्षेत्रीय समझ को प्रस्तुत किया, जिससे उनकी तकनीकी दक्षता एवं तसर रेशम के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ।
समापन संबोधन में डॉ. एन. के. भाटिया ने तसर रेशम मूल्य श्रृंखला को सशक्त बनाने हेतु वैज्ञानिक अनुशासन, कठोर गुणवत्ता नियंत्रण प्रोटोकॉल एवं प्रौद्योगिकी आधारित हस्तक्षेपों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने नव-नियुक्त वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे इस प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का उपयोग क्षेत्रीय कार्यान्वयन, विस्तार गतिविधियों एवं अनुसंधान कार्यों में करें, ताकि रेशम क्षेत्र का सतत विकास सुनिश्चित हो सके।
कार्यक्रम का संचालन आई. पी. एस. लोधी द्वारा किया गया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन जे. कोमल, वैज्ञानिक-बी, CSB-BTSSO, बिलासपुर द्वारा प्रस्तुत किया गया।