50 साल से अधूरा भूमि सर्वे: झारखंड हाईकोर्ट सख्त, विभागीय सचिव को तलब
रांची: झारखंड में पिछले करीब 50 साल से लंबित भूमि सर्वेक्षण (लैंड सर्वे) का काम पूरा नहीं होने पर झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार पर कड़ी नाराजगी जताई है। सोमवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव को 15 जुलाई तक व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।
कोर्ट ने कहा कि पिछली सुनवाई में विभागीय सचिव को खुद शपथपत्र देने का निर्देश दिया गया था, लेकिन उनकी जगह अवर सचिव ने हलफनामा दाखिल कर दिया। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आदेश का पालन नहीं किया गया।
हाईकोर्ट ने याद दिलाया कि 17 जून 2025 को सरकार को नई तकनीक अपनाकर छह महीने के भीतर पूरे राज्य का भूमि सर्वे पूरा करने का निर्देश दिया गया था। लेकिन अब तक यह काम पूरा नहीं हो सका है।
सरकार ने अदालत को बताया कि पुरानी तकनीक के कारण सर्वे में देरी हो रही है। इसलिए केरल और कर्नाटक की आधुनिक सर्वे प्रणाली का अध्ययन किया जा रहा है। साथ ही पुराने जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने का काम भी चल रहा है।
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार अब तक सिर्फ लातेहार और लोहरदगा जिले में ही भूमि सर्वे का काम पूरा हुआ है। बाकी जिलों में सर्वे अभी जारी है।
जनहित याचिका में कहा गया है कि राज्य में आखिरी बड़ा भूमि सर्वे वर्ष 1932 में हुआ था। इसके बाद 1975-80 में दोबारा सर्वे शुरू किया गया, लेकिन लगभग 50 साल बाद भी यह पूरा नहीं हो पाया। हाईकोर्ट ने कहा कि समय पर भूमि सर्वे पूरा होने से आम लोगों की जमीन के साथ-साथ सरकारी जमीन की भी सुरक्षा सुनिश्चित होगी।


