2019 के जानलेवा हमला मामले में बड़ा फैसला, एक ही परिवार के 7 आरोपी बरी
रांची: पिठोरिया थाना क्षेत्र के ऊपर कोंकी गांव में वर्ष 2019 में हुए बहुचर्चित जानलेवा हमला और मारपीट मामले में रांची सिविल कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर न्यायायुक्त (AJC-XVII) संजीव झा की अदालत ने एक ही परिवार के सात आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा।
मामला 23-24 दिसंबर 2019 का है। प्राथमिकी के अनुसार, सड़क किनारे खड़ी मोटरसाइकिल को गिराने को लेकर शुरू हुए विवाद ने अगले दिन हिंसक रूप ले लिया था। आरोप था कि धारदार हथियार, रॉड और लाठी से हमला कर तीन लोगों को गंभीर रूप से घायल किया गया और नकदी व मोबाइल भी छीन लिया गया। इस मामले में पुलिस ने एक ही परिवार के आठ लोगों को आरोपी बनाया था। ट्रायल के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई, जबकि शेष सात आरोपियों पर सुनवाई चली।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष घायलों की मेडिकल रिपोर्ट (इंजरी रिपोर्ट) और इलाज करने वाले डॉक्टरों की गवाही पेश नहीं कर सका। इससे यह साबित नहीं हो सका कि घायलों को किस प्रकार की चोटें आई थीं और कथित हथियारों का इस्तेमाल हुआ था या नहीं।
कोर्ट ने यह भी माना कि मामले के दो स्वतंत्र गवाह अपने बयान से मुकर गए, जबकि एक अन्य गवाह ने केवल विवाद होने की बात कही और किसी आरोपी की पहचान नहीं की। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि पूरे मामले की जांच करने वाले मुख्य अनुसंधान अधिकारी (आईओ) को भी अदालत में गवाही के लिए पेश नहीं किया गया। केवल चार्जशीट दाखिल करने वाले पुलिस अधिकारी ने बयान दिया, जिन्हें घटना की प्रत्यक्ष जानकारी नहीं थी।
इन सभी तथ्यों को देखते हुए अदालत ने कहा कि केवल सूचक और पीड़ित पक्ष के बयानों के आधार पर, बिना स्वतंत्र और चिकित्सीय साक्ष्यों के, आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने सातों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए गैरकानूनी जमावड़ा, जानलेवा हमला, मारपीट और चोरी समेत सभी आरोपों से बरी कर दिया। चूंकि सभी आरोपी पहले से जमानत पर थे, इसलिए अदालत ने उनके बेल बॉन्ड की देनदारियों से भी मुक्त करने का आदेश दिया।


